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ईद-उल-अजहा के अवसर पर शाही ईदगाह बलौदा में सामूहिक नमाज़ अदा, अमन-चैन एवं सामाजिक सद्भाव हेतु की गई विशेष दुआ

 

बलौदा ,29 मई
ईद-उल-अजहा के पावन एवं धार्मिक महत्व के अवसर पर नगर बलौदा स्थित हरदी बाजार-बलौदा मार्ग पर अवस्थित शाही ईदगाह परिसर में सुन्नी मुस्लिम जमात के तत्वावधान में सामूहिक रूप से ईद-उल-अजहा की नमाज़ अदा की गई। इस अवसर पर मुस्लिम समाज के लोग प्रातःकाल स्थानीय जामा मस्जिद परिसर में एकत्रित होकर अनुशासित जुलूस के रूप में ईदगाह पहुंचे, जहां धार्मिक परंपराओं एवं शरीयत के अनुसार नमाज़ संपन्न हुई।

नमाज़ अदा किए जाने उपरांत देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि, सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारा, अमन-चैन तथा समस्त मानव समाज के कल्याण हेतु विशेष दुआ की गई।

इस अवसर पर मकामी इमाम जनाब अबरार रज़ा ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित (तकरीर) करते हुए हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम एवं हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी के ऐतिहासिक एवं धार्मिक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा त्याग, समर्पण, धैर्य, ईमानदारी एवं ईश्वर के प्रति पूर्ण आज्ञाकारिता का प्रतीक पर्व है। हज़रत इब्राहीम (अ.स.) द्वारा अल्लाह के हुक्म के पालन हेतु अपने प्रिय पुत्र हज़रत इस्माईल (अ.स.) की कुर्बानी देने की तत्परता मानव समाज के लिए अनुपम उदाहरण है। अल्लाह तआला द्वारा उनकी आज्ञाकारिता स्वीकार करते हुए हज़रत इस्माईल (अ.स.) के स्थान पर दुम्बा भेजा जाना इस्लामी इतिहास की महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जो समस्त मानवता को त्याग एवं समर्पण का संदेश प्रदान करती है।

मुस्लिम जमात के सदस्य आरिफ कुरैशी ने बताया कि कुर्बानी का वास्तविक आशय केवल पशु की कुर्बानी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के भीतर विद्यमान अहंकार, लालच, स्वार्थ एवं बुराइयों का परित्याग करना भी इसका मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा समाज में प्रेम, करुणा, सहयोग एवं मानवता की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करती है।

नमाज़ उपरांत उपस्थित लोगों द्वारा परस्पर गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी गई तथा सामाजिक एकता, पारस्परिक सहयोग एवं सद्भाव बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया गया। साथ ही जरूरतमंद एवं वंचित वर्ग के सहयोग एवं सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन पर भी विशेष बल दिया गया।

उक्त अवसर पर मुस्लिम जमात के सदर जनाब अब्दुल जब्बार खान, हाजी रफीक कुरैशी, शेख उमर, हाजी नजीर अहमद, ईद कादिर मोहम्मद, हाजी बशीर मोहम्मद, डॉ हाजी रज्जाक रिजवी ,डॉ. अब्दुल अजीज, डॉ. जाहिद मोहम्मद, हाजी रऊफ रिजवी, रज्जाक खान, हसन खान, साबरी, गनी मोहम्मद, सलीम मोहम्मद, हाजी सरदार मोहम्मद, राजू मेमन, सफ़र मोहम्मद, फारुख मोहम्मद, अकबर मोहम्मद, कलम बेग, मोमिन, सोमिन मोहम्मद, हाजी हाशिम मोहम्मद, अशरफ मोहम्मद, शकील, नवाब कादरी, डॉ. बदूद मोहम्मद, डॉ. कय्यूम, रहमत खान (गुड्डा), जहान मोहम्मद, शफीक मोहम्मद, यूसुफ मोहम्मद, सगीर मोहम्मद, आरिफ कुरैशी, हैदर खान, शिबू खान, नूर मोहम्मद, नसीब मोहम्मद, मुस्तफा खान, इलयास मोहम्मद, हारून खान, बिलाल खान, सलमान खान, अलीम मो, गरीब मो, मोमिन हैदर खान अब्दुल, अकरम मेमन एवं इमरान उत्तरी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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