बलौदा 24,अगस्त
काँवड़ यात्रा आस्था, भक्ति धर्म और समर्पण का प्रतिक
पावन श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की भक्ति में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। इसी क्रम में शिवरीनारायण के महानदी से जल लेकर बलौदा स्वंभू फोड़ महादेव बंधवा तालाब की ओर कांवड़ यात्रा पर निकले सभी श्रद्धालुओं को मनोकामना पूर्ण होने, सुखद, सुरक्षित एवं सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रतिवर्ष बलौदा और आसपास के गाँवों झेपेली,नागपुरा,कोरबी,रामपुर चारपारा से करीब हजार से ज्यादा काँवड़िये श्रावण मास के प्रथम सोमवार को कनकी पंतोरा के कनकेश्वर महादेव में जल अर्पित किये और अंतिम सोमवार को स्वयंभू फोड़ महादेव में जल चढ़ाने महानदी से जल लेकर निकले थे श्रावण मास में निकलने वाली कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, तपस्या और समर्पण की यात्रा है। भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास इस यात्रा में दिखाई देता है। कांवड़ यात्री कठिन परिस्थितियों और लंबी दूरी की चुनौतियों के बावजूद पूरे उत्साह एवं श्रद्धाभाव आकर्षक झाँकियों और गाजे बाजे के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं। यह यात्रा श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है।

बलौदा के वासियों ने कांवड़ यात्रियों का जगह जगह फल ,चाय भोजन भंडारा से स्वागत किया , करते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी श्रद्धालुओं की यात्रा उनके परिवार के लिए भोलेनाथ से मनोकामना पुरी करने, सुखद, यात्रा सफल होने की कामना की। बाबा सभी कांवड़ यात्रियों पर अपनी कृपा बनाए रखें और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करें।
कांवड़ यात्रियों में दिखा जबरजस्त उत्साह भक्तिभाव से शराबोर पुरा नगर शिवमय हो गया है नगर के शिवालय बड़े मंदिर,और बंधवा तालाब में दिनभर भारी बारिश कर बावजूद श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहा ।
शिवरीनारायण महानदी से जल लेकर बलौदा की ओर बढ़ रहे कांवड़ यात्रियों में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला।
श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ कांवड़ लेकर अपनी यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत, सेवा और सत्कार भी किया जा रहा है। इससे यात्रा मार्ग पर भक्ति और सेवा का वातावरण बना हुआ है।
नगर में हनुमान कुट्टी मंदिर,स्वर्णकार धर्मशाला, शीतला मंदिर,बुधवारी चौक में रात्रि विश्राम ,भंडारा, चाय,फलाहारी की व्यवस्था नगर के लोगों ने की थी, धार्मिक यात्राएं समाज में भाईचारे, सेवा, सद्भाव और एकजुटता की भावना को मजबूत करती हैं। कांवड़ यात्रियों की सेवा करना, उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनका उत्साह बढ़ाना भी भगवान शिव की भक्ति का ही एक रूप है। छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में श्रद्धा, सेवा और सामुदायिक सहभागिता का विशेष महत्व रहा है।
इस अवसर पर पूरा वातावरण भक्तिमय रहा और ‘हर हर महादेव’ बोलबम के जयकारों से गूंजता रहा। कांवड़ यात्रा में लोगों ने आत्मीय स्वागत किया।
