khabarbhartiya.in
छत्तीसगढ़जांजगीर चांपाधर्म और आस्था

नौ दिवसीय अखंड नवधा रामायण का गुरुवार को समापन हुआ।

बलौदा – 29 मई

सभी नियमित मानस मंडलियां एक साथ नवधा रामायण के अंतिम चौपाई गा कर समापन किये।
मो सम दीन न दीन हित, तुम्ह समान रघुबीर।
अस बिचारि रघुबंस मनि, हरहु बिषम भव भीर॥
अर्थात-हे रघुवीर! मेरे समान तो कोई दीन नहीं है और आपके समान कोई दीनबंधु नही है। ऐसा विचारकर हे रघुवंश-मणि! जन्म-मरण के महान् भय का नाश कीजिए।

 

अंतिम दिन पं.भास्कर पांडेय ने हवन व सहस्त्रधारा का विधान मंत्रोच्चार के साथ कराया। नवधा रामायण आयोजन समिति की ओर से भंडारा का आयोजन किया। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। नगरवासियों ने नौ दिन तक भगवान राम की कथा सुनकर भक्तिभाव में डूबे रहे। इस अवसर पर आसपास गांवों की रामायण मानस मंडलियों ने पहुंचकर भजन-कीर्तन रामायण का गान किया। इससे नगर का माहौल भक्तिपूर्ण राम मय हो गया था।

Related posts