बलौदा, 29 अक्टूबर
बलौदा- नगर के नवल भवन में स्वर्णकार राजा परिवार के द्वारा श्री यज्ञनारायण सोनी जी के स्मृति में आयोजित 7 दिवसीय भागवत कथा सप्ताह का समापन हवन सहस्त्रधारा, भंडारे के साथ हुआ।

भागवत कथा विश्रान्त समापन के अवसर पर ब्यासपीठ से आचार्य लाड़ली रुचिता तिवारी ने बताया की भागवत ग्रंथ पवित्र ग्रंथ है।भागवत कथा सुनने से ही राजा परीक्षित की सद्गति हो गई थी। कथा को मोक्ष प्राप्ति के लिए समाज को इसका श्रवण करना चाहिए।सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के बारे में जानकारी देते हुए कथाव्यास आचार्य ने बताया की प्रथम दिन ज्ञान,वैराग्य,भक्त तथा धुधकारी,गौकर्म मोक्ष पर कथा केंद्रित रही वही दूसरे दिन राजा परीक्षित की जन्म से लेकर कली दमन तक की कथा सुनाई गई।जबकि भागवत कथा के तीसरे दिन बारहों अवतार से लेकर नरसिंह अवतार अजामिल चरित्र ,और प्रहलाद चरित्र पर केंद्रित रही।
समुंद्र मंथन से लेकर वामन अवतार श्री राम जन्म और श्री कृष्ण जन्म पर भक्तों के बीच चौथे दिन श्रवण कराया गया।कथा के पांचवे दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण की रुक्मणि विवाह , कंश वध का कथा वाचन किया गया। छठवें दिवस की कथा सुदामा चरित्र , भगवान का स्वधाम गमन विदाई , अनुरुद्ध की कथा बतलाई गई ।सातवें समापन दिवस पर सुदामा चरित्र कथा और परीक्षित मोक्ष की कथा के साथ कथा विश्राम हुआ ।
श्रीमद् भागवत में 335 अध्याय हैं। यह व्यास जी द्वारा 18 पुराणों में से रचित बहुत श्रेष्ठ पुराण है। श्रीमद् भागवत कथा में 18 हजार श्लोक, 335 अध्याय व 12 स्कंध हैं। अन्य पुराणों के समान, श्रीमद् भागवत ऋषि वेद व्यास द्वारा लिखे गए हैं। ऋषि शुकदेव जी, जो वेद व्यास के बेटे थे उन्होंने श्रीमद् भागवत को राजा परीक्षित को सुनाया था। राजा परीक्षित वो जिनको ऋषि श्रृंगी द्वारा 7 दिनों में तक्षक साँप द्वारा मारे जाने के लिए शाप दिया गया था। सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है, इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए।
