बलौदा,3 अक्टूबर
बेमौसम की बारिश से बलौदा सहित कई शहरों में रावण जलने से पहले ही भीग गया. जिस वजह से दशहरा उत्सव और मेले का जश्न फीका पड़ गया.
सुबह से मौसम तो खिली थी लेकिन दोपहर 2 बजे के बाद से अचानक मौसम ने करवट बदली और बादल के साथ तेज बिजली चमक के साथ बारिश होने लगी,जिसके कारण कई दिनों से तैयार कर रहें रावण पुतला पुरी तरह से भीग कर दहन से पहले ही गीले हो गया, जिससे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया. हालांकि प्लास्टिक और तिरपाल से उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन तेज़ हवा और बारिश के आगे सब बेअसर साबित हुआ.
आज दशहरे का जश्न मनाया जा रहा था. शाम ढलते ही कोने-कोने में रावण के पुतलों का दहन होने लगता है. आतिशबाज़ियों की गूंज, जयकारों की आवाज़ और लपटों में सिमटती बुराई. हर साल की तरह इस बार भी दशहरा अच्छाई की जीत का साक्षी बना. जब रावण के पुतलों में आग लगी तो बच्चों की आंखों में उत्साह, बुज़ुर्गों के चेहरों पर संतोष और हर किसी को यही संदेश मिल रहा था कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी हो, अंत उसका तय है. अबकी बार रावण सिर्फ बुराई से नहीं, बादलों से भी हार गया. हर साल दशहरे पर जब शाम ढलने लगती है, तो आसमान में आतिशबाज़ियों की चमक और धूमधड़ाका, मैदानों में रावण के जलते पुतलों की लपटें दिखाई देती हैं, लेकिन इस दफा इंद्रदेव की मेहरबानी की वजह से रावण जलने से पहले ही गल गया. लेकिन फिर भी रावण का पुतला धू-धू कर जला।
नगर में पिछले वर्षों की तरह भीड़ और व्यवस्था को देखते हुए इस बार रावण दहन के लिए पुलिस थाना के आगे मंडी प्रांगण मे चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के साथ दशहरा उत्सव मनाने का निर्णय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने लिया और उसी अनुरूप तैयारी भी कर रखी थी.और दशहरा मेला की धूम के बीच ‘रावण दहन’ पूरे उत्साह के साथ किया जाना था.
दोपहर भारी बारिश के बाद रावण के पुतले को बचाने के सारे जतन किये गये, जैसे ही शाम ढ़ली फिर शाम से रुकरूक कर बारिश ने एक बार सारी तैयारी पर पानी फेर दिया,मंडी प्रांगण में मेले के लिए आये दुकानदारों की मुश्किल बढ़ गई ,मंडी जाने का रास्ता और मैदान पानी और कीचड से सराबोर हो गया ,चाट गुपचुप,होटल ,खलोने ,फोटो आदि दुकानें सभी की व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो गया।
रावण दहन को देखने नगर और आसपास के गाँवों से आने वाले लोग भी बारिश के कारण वहाँ बहुत कम लोग ही मंडी प्रांगण पहुंचे इसी बीच जैसे तैसे रावण के विशाल पुतलों को अग्नि के हवाले किया गया.
नगर की परम्परा अनुसार राम लक्ष्मण और हनुमान जी की झांकी रथ मे सवार होकर नगर भ्रमण को निकली जहां लोगों ने राम लक्ष्मण की झांकी की आरती पुष्प माला से आरती उतारी।जगह जगह आतिश बाज़ियों के धूम-धड़ाके के बीच और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न उत्साह से मनाया. बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर चेहरा इस सांस्कृतिक उत्सव की रौशनी में दमकता नजर आया.
साल मे एक बार का त्योहार दशहरा बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ गया।
