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होलिका दहन के साथ होली मनाने जुटे नगर वासी!

बलौदा, 3 मार्च। नगर में होली महापर्व की तैयारियां के उपरांत रात को उत्साह के माहौल में होलिका दहन हुआ। नगर की प्रथम होलीका “राजा होली” हलवाई चौक,दूसरी होलिका “रानी होली” बुधवारी चौक, और नगर के सुरक्षा के लिए “मंत्री होलिका” नैया तालाब के पास होलिका तैयार की गई थी जहाँ भक्त प्रहलाद की आंशिक स्वरूप भी विराजित की गई थी, जो आकर्षण का केन्द्र रहा।जिसे आज मंगलवार को चन्द्रग्रहण मोक्ष के बाद रात 10 बजे नगर के प्रमुख यजमानों गौटिया परिवार और आचार्य जी वैदिक मंत्रोचार से शान्ति पूर्वक होलिका दहन के साथ ही रंग, उमंग और उल्लास के पर्व होली की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है।
आज सुबह से नगर में पुलिस प्रशासन की चाक चौबंद ,यातात व्यवस्था, किसी भी भीड़, उपद्रव आदि से निपटने के लिए पुलिस के आला अधिकारी और जवान लगें है।

होली की परिक्रमा करने का कारण:
होली का दिन स्वयं को शुद्ध करने और सर्दियों के मौसम में हुई किसी भी एलर्जी से अपने शरीर को मुक्त करने का दिन है। होली पर लकड़ियां जलाने और घूमने के पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि अलाव की गर्मी से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं ।

होली क्यो मनाते है:
होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई, और प्रह्लाद सुरक्षित बच गया, उसका विश्वास अविचलित रहा। इस विजय का जश्न मनाने के लिए, होली की पूर्व संध्या पर समुदाय होलिका दहन के लिए एकत्रित होते हैं। ये अग्नि इस बात का स्मरण दिलाती है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह सत्य के प्रकाश के सामने कभी टिक नहीं सकती।

यह रंगों, भाईचारे और खुशियों का त्योहार माना जाता है। पहले दिन “होलिका दहन” किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दूसरे दिन रंगों से खेला जाता है, जिसे “धुलेंडी” या “रंग वाली होली” कहते हैं। इस दिन लोग आपसी मनमुटाव भुलाकर एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं।

 

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